संक्षिप्त सार
क्षेत्रीय मार्गदर्शक: पूर्वोत्तर, उत्तर, दक्षिणपूर्व, दक्षिण और मध्य-पश्चिम में परस्पर मिलती किस्में हैं।
ध्वनिवैज्ञानिक चिह्न: R का उच्चारण (एकल स्पर्श/कंपन/कंठद्वारी/मूर्धन्य), S की ध्वनियाँ (वर्त्स्य/तालव्य), स्वर का ऊँचा/नीचा होना
रूप-वाक्यगत गुण: Tu बनाम você का प्रयोग, जेरुंड बनाम अनंत रूप, उपपद का प्रयोग, क्लिटिक का स्थान
शब्दावली की विविधता: साझा अवधारणाओं के लिए अलग शब्द और रजिस्टर, निश्चित शब्द-संख्या या अनन्य मानचित्रों के बिना।
स्वर-लय के ढाँचे: बोलने की लय, स्वराघात की वक्ररेखाएँ, स्वर की लंबाई
प्रतिष्ठा: सामाजिक मूल्यांकन संदर्भ पर निर्भर हैं; कोई क्षेत्रीय किस्म भाषिक रूप से श्रेष्ठ नहीं।
क्षेत्र के भीतर विविधता: नगर, ग्रामीण समुदाय, पीढ़ियाँ और नेटवर्क अलग हो सकते हैं।
मीडिया और पहचान: व्यापक प्रसार क्षेत्रीय संबंधों के साथ रह सकता है; अपनाना स्वचालित नहीं।